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उत्तराखंड पहाड़ का लोक उत्सव सातूं-आठूं

पहाड़ का लोक उत्सव 'सातूं-आठूं' ********* देव-भूमि कहे जानेवाले उत्तराखंड में ऐसा ही एक पर्व है सातों-आठों या सातूँ-आठूँ। भाद्रपद मास में अमुक्ताभरण सप्तमी को सातूं, और दूर्बाष्टमी को आठूं मनाया जाता है। भाद्रपद मास में सातूं-आठूं कृष्ण पक्ष में

उत्तराखंडी के प्रसिद्ध पारम्परिक लोक वाद्ययंत्र वाद्ययंत्र

उत्तराखंड राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध है । यहाँ के वाद्य यंत्र हम सभी को थिरकने के लिए मजबूर करते हैं । तो आइए हम भी जाने यहाँ के वाद्य यंत्रों के बारे में ।उत्तराखंड राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध

उत्तराखंड का लोक नृत्य – चाँचरी(झोड़ा)

यह नृत्य, स्त्री-पुरुषों द्वारा किए जाने वाला एक सामूहिक नृत्य-गीत है।.यह उत्तराखंड के प्रमुख लोक नृत्यों में से एक हैं। कुमाऊं क्षेत्र में इस नृत्य को झोड़ा कहते है उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की झोड़ा चाँचरी बहुत ही प्रसिद्ध है।किसी भी शुभ कार्य के अवसर पर झोड़ा चाँचरी देखने को

गंगनाथ देवता मंदिर कांडा धपोली (बागेश्वर)

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गंगनाथ जी पूरे उत्तराखण्ड में भगवान की तरह पूजे जाते है। और उनके लाखो भक्त भी है। उत्तराखण्ड में गंगनाथ जी की कथा को एक गीत के माध्यम से उनकी पूजा में जगरी के द्वारा गाया जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊँनी लोकनृत्य में लोकदेवता पर आधारित श्री गंगानाथ जागर

मातृ शक्ति संस्कृति का दर्पण कार्यक्रम

जीवन कला संगम समिति मेहरागाव के द्वारा श्रीनंदा देवी महोत्सव समिति के साथ मिलकर अगामी 11 मार्च 2018 को गजराज होटल सभागार गजराज मार्केट मेन बाजार भवाली में मातृ शक्ति संस्कृति का दर्पण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमे सामाजिक संस्कृति व अनय क्षेत्रों मे कुशल कार्य कर रही

ऐपण ~ उत्तराखंड की विश्व विख्यात परंपरागत कला

ऐपण पारम्परिक हस्तकला उत्तराखंड की संस्कृति में रची बसी एक प्रचीन कला है उत्तराखंड की संस्कृति में विभिन्न प्रकार की लोक कलाएं मौजूद है। उन्ही में से एक प्रमुख कला पारम्परिक हस्तकला ऐपण भी है उत्तराखण्ड की पारम्परिक हस्तकला ऐपण का दीवाली पर्व में विशेष महत्व है। ऐपण कलात्मक अभिव्यक्ति का

उत्तरायणी कौतिक का गौरवमय इतिहास

उतरैणी कौतिक' इस शब्द में उतरैणी का अर्थ है कि सूर्य देेव का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना है और कौतिक का अर्थ है मेंला, हर वर्ष सूर्य देव छः माह उत्तरायण में रहते है और छः माह दक्षरायण में, मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करते है इस

उत्तरायणी कौतिक में सजा भव्य बागेश्वर

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उत्तरायणी कौतिक बागेश्वर-2018 बागनाथ देवता की गोद में सरयू-गोमती नदी के संगम तट पर बसा बागेश्वर इन दिनों सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ है। तहसील व जनपद बागेश्वर के अन्तर्गत सरयू गोमती व सुष्प्त भागीरथी नदियों के पावन सगंम पर उत्तरायणी मेला बागेश्वर का भव्य आयोजन किया जाता है।

यूथ उत्तराखंड और जीवन वर्षा कला संगम समिति नैनीताल द्वारा इंडियन मॉडर्न स्कूल (IMS) मेहरा गांव भीमताल और सांस्कृतिक कार्यक्रम

बाल दिवस (14 नवंबर) के मौके पर यूथ उत्तराखंड  Youthuttarakhand और जीवन वर्षा कला संगम समिति नैनीताल द्वाराइंडियन मॉडर्न स्कूल (IMS) मेहरा गांव भीमताल में कला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि महिला मोर्चा भाजपा प्रदेश महिला उपाधयक्ष ऋतू डालाकोटी प्रबंधक दिनेश पांडे प्रधानाचार्या हरीश तिवारी समिति

श्री छुरमल देवता मंदिर गंगोलीहाट पिथौरागढ़

श्री छुर्मल देवता मंदिर गंगोलीहाट पिथौरागढ़ छुरमल देवता का मंदिर अपनी सौन्दर्यता और नवरात्र समापन के दिन लगने वाले ऐतिहासिक मेले के लिये प्रसिद्ध हैं छुरमल देव को परम्परा के हिसाब से नया ढूध चढ़ाया जाता है, और लापसी (कुमाऊनी Sweetdish) का प्रसाद बनाया जाता है, मेले में रात भर झोड़ा-चांचरी और

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