मेरी भग्यानी

मेरी भग्यानी में शिवम् भट्ट का शानदार लेखन और शानदार अभिनय है. शिवम् भट्ट ने कई उत्तराखडं के हिट गानो का लेखन किया है लेकिन इस बार शिवम् भट्ट का लेखन और अभिनय दोनों साथं देखने को मिलेगा.गुंजन डंगवाल के शानदार संगीत इस वीडियो में मिलेगा टीम टोर्नेडो द्वारा बनाया गया शानदार

ऋषिकेश के राजेश चंद्र द्वारा बनायीं गयी उत्तराखडं की बेहतरीन कलाकृति

  उत्तराखंड   ऋषिकेश के राजेश चंद्र इस वक्त देहरादून के मिनेर्वा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मॅनॅग्मेंट एंड टेक्नोलॉजी से डिग्री ले रहे हैं। बचपन से ही कला में रुचि रखने वाली राजेश  शायद हमेशा से जानते  थे कि उन्हें कला के क्षेत्र में आगे बढ़ना है और तभी शुरु से ही उन्होंने इसमें प्रोफेशनल

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संगीत के क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य का अपना महत्व है । यहाँ अनेक प्रकार के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है । यहाँ के मुख्य वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ, मशकबीन, रणसिंहा, हुड़की, बिणाई,ताली आदि हैं ।ऐसे ही एक क्रिएटिव गाना और संगीत जो युवाओ के बीच फेमस हो रहा है PAHADI__A__CAPPLLA आज

झाकर सेम देवता मंदिर

झाॅकरसैम देवता : """""""""""""""""""""""" झाँकरसैम मंदिर महादेव शिव के अवतार सैम देवता को समर्पित यह प्रसिद्ध देवालय अल्मोड़ा जनपद के जागेश्वर से चार किलोमीटर दक्षिण में दारुका वन में देवदार के वनों के बीच एक पहाड़ी पर स्थित है। इतिहासकार डॉ. मदन चंद्र भट्ट के अनुसार सैम देवता की माँ कालीनारा राजा

कोट भ्रामरी मंदिर

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कोट भ्रामरी मंदिर, जिसे भ्रामरी देवी मंदिर और कोट की माई भी कहा जाता है, एक पहाड़ी की चोटी पर गरुड़ से 5 किमी दूर स्थित है। एक लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि महान भारतीय गुरु, आदि गुरु शंकराचार्य, गढ़वाल के क्षेत्र में यात्रा करते समय

माँ सुरकण्डादेवी मन्दिर

उत्तराखंड की धरती, जो कि देवी-देवताओं की भूमि कही जाती है। इस धरती पर ना जाने कितने ऐसे चमत्कार हैं, जो आपको कदम कदम पर नजर आते हैं। इन्हीं चमत्कारों में एक सबसे बड़ा चमत्कार है मां सुरकण्डा देवी का मंदिर। माता का यह मंदिर #टिहरी जिले के जौनपुर प्रखंड में

माँ कसार देवी – अल्मोड़ा

🙏माँ कसार देवी - अल्मोड़ा🙏 शक्ति के आलोकिक रूप का प्रत्यक्ष दर्शन उत्तराखंड देवभूमि में होता है। उत्तराखंड राज्य अल्मोड़ा जिले के निकट “कसार देवी” एक गाँव है।जो अल्मोड़ा क्षेत्र से 8 km की दुरी पर काषय पर्वत में स्थित है। यह स्थान “कसार देवी मंदिर” के कारण प्रसिद्ध है |

राजुला-मालूशाही

राजुला-मालूशाही उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र की एक अमर प्रेम कहानी है. प्रेम के प्रतिरोधों, विरोधों, विपरीतपरिस्थितियों, समाज एवं जातिगत बंधनों में उलझ कर सुलझ जाने वाली इस कहानी में प्रेम पथिकों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा........जरूर पढ़ें!!!! उत्तराखंड में जब कत्यूर राज वंश के के राजा दुलाशाह का शाशन और राजधानी

मां रशुलन दीबा मन्दिर

मां_रशुलन_दीबा_मन्दिर....उत्तराखण्ड में स्थित विश्व का इकलौता मन्दिर जहां रात भर नंगे पांव कठिन चढ़ाई चढ़कर प्रात:काल दर्शन किये जाते हैं माँ रशुलन दीबा का ये मंदिर पौड़ी के पट्टी किमगडी गढ़ पोखरा ब्लॉक के झलपड़ी गावं के ऊपर घने जंगल से होते हुए रशुलन दीबा माता मंदिर पड़ता है यदि आप भी दीबा माता के दर्शन को आना चाहते

जय माँ नंदा सुनंदा

🙏जय माँ नंदा सुनंदा 🙏 सरोवरनगरी का नंदा महोत्सव आज अपने चरम पर है। पिछली शताब्दी और इधर तेजी से आ रहे सांस्कृतिक शून्यता की ओर जाते दौर में भी यह महोत्सव न केवल अपनी पहचान कायम रखने में सफल रहा है, वरन इसने सर्वधर्म संभाव की मिशाल भी पेश की

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